दुसरो के लिय जिना हे जिंदगी का एक ही मक्सद मेरा..
हर एक के चेहरे पे मुस्कुराहत लाना काम हे मेरा...
क्या पता..कल किसने देखा हे..
कल हम हो या ना हो ये सिर्फ खुदा जांनता हे..
इसलीय एक पलकी हे ये जिंदगी यही मांनता हु मै..
उस पल को दुसरो के लिय जिना चाहता हु मै..
इंसानियत की इस दुनिया मे, ना जाने इंसानियत कहा खौ गई हे..
अब बस हो गया..! अब तो हर एक इंसान को इंसानियत सिखाना चाहता हु मै...
प्यारी सी इस दुनिया मे ना जाने प्यार किस किस के दिल मे चुप के बेठा हे...
अब हर एक के दिल मे चुपा हुवा प्यार ढूँढ़ना चाहता हु मै...
मेरे जिंदगी का मक्सद पुरा करना चाहता हु मै..
मेरे जिंदगी का मक्सद पुरा करना चाहता हु मै..
✒...रोहित जगताप
Well said Mr. Rohit Jagtap. Hatsoff
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